'राष्ट्रीय एकता' (National Integration) राष्ट्रीय एकता: विविधता में अखंडता, संप्रभुता और राष्ट्र-निर्माण की धुरी राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं या भू-भाग का नाम नहीं है, बल्कि यह समान इतिहास, साझा सांस्कृतिक चेतना, सामूहिक आकांक्षाओं और भावात्मक जुड़ाव से निर्मित एक जीवंत इकाई है। जब किसी राष्ट्र की जनता विभिन्न विविधताओं के बावजूद एक केंद्रीय राष्ट्रीय पहचान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहती है, तब राष्ट्रीय एकता (National Integration) का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है। भारत जैसे बहुसांस्कृतिक, बहुभाषी और बहुधार्मिक देश में राष्ट्रीय एकता का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। विविधता हमारी शक्ति है, बशर्ते इसे राष्ट्र-निर्माण की रचनात्मक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाए। 1. राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ और वैचारिक आधार राष्ट्रीय एकता एक ऐसी मानसिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत किसी राष्ट्र के नागरिक विभिन्न प्रकार के क्षेत्रीय, भाषाई, धार्मिक, जातीय और सांस्कृतिक भेदों को पीछे छोड़कर एक सुदृढ़ सामूहिक पहचान का अनुभव करते हैं। भावनात्मक एकीकरण: यह केवल कानू...
अधिकार (Rights) और वैधता (Legitimacy) वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य 1. अधिकार और वैधता का आधुनिक स्वरूप आज की डिजिटल और लोकतांत्रिक दुनिया में, अधिकारों और वैधता का दायरा केवल कागजी कानूनों या पारंपरिक राजशाही तक सीमित नहीं है। अब इसमें डिजिटल अधिकार, व्यक्तिगत गोपनीयता (Privacy), और वैश्विक मानवाधिकार भी शामिल हो चुके हैं। 2. अधिकारों के वर्तमान उदाहरण क) डिजिटल अधिकार और निजता का अधिकार (Digital & Privacy Rights) आज का युग डेटा और इंटरनेट का है। नागरिकों को अपने डेटा की सुरक्षा और निजता का अधिकार मिलना एक नया मौलिक अधिकार बन गया है। वर्तमान उदाहरण: भारत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुट्टस्वामी निर्णय (2017) में निजता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया गया। इसी प्रकार, यूरोपीय संघ (EU) का जीडीपीआर (GDPR) कानून नागरिकों को उनके डिजिटल डेटा पर पूर्ण अधिकार देता है। यदि कोई टेक कंपनी (जैसे Meta या Google) इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाता है, जो अधिकारों के कानूनी संरक्षण को दिखाता है। ख) अभिव्यक्ति...