वैश्वीकृत राजनीतिक अर्थव्यवस्था की वर्तमान कार्यशैली और इक्कीसवीं सदी की राजनीतिक-आर्थिक चुनौतियाँ प्रस्तावना: भूमंडलीकरण का बदलता परिदृश्य बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में सोवियत संघ के विघटन और उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण (LPG Policies) के प्रसार के साथ जिस 'वैश्वीकृत राजनीतिक अर्थव्यवस्था' (Globalized Political Economy) का उदय हुआ था, उसने दुनिया को एक 'ग्लोबल विलेज' में बदल दिया था। पूंजी, प्रौद्योगिकी और श्रम का निर्बाध प्रवाह इसका मुख्य आधार था। लेकिन इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में प्रवेश करते-करते यह व्यवस्था एक गंभीर वैचारिक और संरचनात्मक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। वर्तमान में भू-राजनीतिक संघर्षों, महाशक्तियों के बीच व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता और महामारी के प्रभावों ने इसकी कार्यशैली को पूरी तरह से बदल दिया है। 1. वैश्वीकृत राजनीतिक अर्थव्यवस्था की वर्तमान कार्यशैली: संरचना और तंत्र आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था केवल कागजी व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके संचालन के पीछे कई जटिल तंत्र काम कर रहे हैं: क. डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा का वैश्वीकरण (Digital & Da...
अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था (IPE) अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था (International Political Economy - आई.पी.ई.) राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र का एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और अंतःविषय (Interdisciplinary) क्षेत्र है। यह इस बात का गहराई से अध्ययन करता है कि कैसे वैश्विक राजनीति (सत्ता, शक्ति, शासन और कूटनीति) और वैश्विक अर्थशास्त्र (धन, उत्पादन, व्यापार, वित्त और बाजार) एक-दूसरे को आकार देते हैं। पारंपरिक रूप से राजनीति और अर्थशास्त्र को दो अलग-अलग अकादमिक अनुशासन माना जाता था—राजनीति का संबंध शक्ति और राज्य से था, जबकि अर्थशास्त्र का संबंध धन और बाजार से था। हालांकि, वैश्वीकरण के इस दौर में यह विभाजन पूरी तरह अप्रभावी हो चुका है। आज कोई भी आर्थिक नीति राजनीतिक निर्णयों के बिना नहीं बनाई जा सकती और कोई भी राजनीतिक निर्णय वैश्विक आर्थिक प्रभावों से अछूता नहीं रह सकता। 1. अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का ऐतिहासिक विकास अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था के मूल को पूरी तरह समझने के लिए यह जानना अनिवार्य है कि अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का विकास किस प्रकार ...