पड़ोसी पहले नीति: दक्षिण एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरण (विशेषकर भारत-मालदीव और भारत-बांग्लादेश संबंध) दक्षिण एशिया भू-राजनीतिक दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत की विदेश नीति का मुख्य स्तंभ 'पड़ोसी पहले' (Neighborhood First Policy) इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने पर केंद्रित है। पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण एशिया के कूटनीतिक परिदृश्य में तेजी से बदलाव आए हैं। विशेष रूप से मालदीव और बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस नीति की गतिशीलता, चुनौतियों और रणनीतिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित किया है। 1. 'पड़ोसी पहले नीति' और इसका रणनीतिक महत्व भारत का यह दृष्टिकोण केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास की एक अनिवार्यता है। दक्षिण एशिया की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि भारत के सामरिक हित सीधे तौर पर उसके पड़ोसी देशों से जुड़े हैं। क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा: भारत की सीमाओं की सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिरता उसके पड़ोसियों के सहयोगात्मक रवैये पर ...
वैश्विक कूटनीति में तकनीक की भूमिका: सेमीकंडक्टर, एआई और साइबर सुरक्षा के नए आयाम आधुनिक युग में कूटनीति की परिभाषा तेजी से बदल रही है। पारंपरिक रूप से जहां कूटनीति का मतलब संधियों, सैन्य शक्ति और भौगोलिक सीमाओं तक सीमित था, वहीं आज 'टेक्नोलॉजी' (Technology) वैश्विक राजनीति का सबसे प्रभावी केंद्र बन गई है। इसे आज 'टेक डिप्लोमेसी' (Tech Diplomacy) कहा जा रहा है, जहां देश अपनी भू-राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। 1. सेमीकंडक्टर कूटनीति: आधुनिक अर्थव्यवस्था का 'नया तेल' आज के डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर चिप्स किसी भी देश की रीढ़ बन चुके हैं। स्मार्टफोन से लेकर आधुनिक युद्धक विमानों और सुपरकंप्यूटरों तक, हर जगह इन छोटी सी सिलिकॉन चिप्स की अनिवार्यता है। चिप वॉर (Chip War) और वैश्विक विखंडन: अमेरिका और चीन के बीच तकनीक पर वर्चस्व की जंग मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर के इर्द-गिर्द घूमती है। महाशक्तियां अब व्यापारिक टैरिफ से आगे बढ़कर तकनीकी चोकपॉइंट्स (Chokepoints) का उपयोग कर रही हैं। आर्थिक सुरक्षा और निवेश: चीन ने अपने 'बिग फंड' ...