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Showing posts from April, 2022

स्थानीय स्वशासन

लॉर्ड रिपन को स्थानीय स्वशासन (भारत में) का जनक कहा जाता है ।1882 में रिपन ने स्थानीय संस्थाओं की मजबूती  हेतु एक प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को स्थानीय स्वशासन का मेग्नाकार्टा कहा जाता है। स्थानीय स्वशासन राज्य सूची का विषय है। अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के गठन का उल्लेख किया गया । 1952 सामुदायिक विकास कार्यक्रम तथा 1953 में राष्ट्रीय सविस्तार योजना जैसे कार्यक्रम लागू किए गए। इन दोनों कार्यक्रम की जांच करने हेतु 1957 में बलवंत मेहता की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। मेहता समिति की सिफारिश पर 2 अक्टूबर1959 को भारत में पहली बार पण्डित जवाहर लाल नेहरु द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव में पंचायत राज संस्थाओं का उद्घाटन हुआ । बलवंत राय मेहता ने ही लोकतांत्रिक शब्द दिया था इसलिए इन्हें Democratic D ecentralization का जनक कहा जाता है । 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार द्वारा अशोक मेहता की अध्यक्षता में गठित समिति ने पहली बार पंचायत राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की सिफारिश की थी । 1986 में राजीव गांधी की सरकार द्वारा लक्ष्मी मल सिंघवी की अध्यक्षता मे...

केंद्रीय सतर्कता आयोग( Central Vigilance Commission)

1962 में भ्रष्टाचार पर रोकथाम लगाने हेतु सुझाव देने के लिए के० संथानम की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया था। संथानम आयोग की सिफारिश पर 1964 में राष्ट्रपति के एक आदेश द्वारा (कार्यपालिका का प्रस्ताव ) सी०वी०सी० की स्थापना की गई । 1998 में राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए एक अध्यादेश से सी०वी०सी० को विधिक(legel)/वैधानिक(statutary)/संविधिक संस्था बनाया गया । वर्ष 2003 में वाजपेयी सरकार द्वारा CVC एक्ट 2003 बनाया गया था। विशेषताएं इसके द्वारा CVC को बहुसदस्यीय संस्था बनाया गया। इसमें 1 मुख्य सतर्कता आयुक्त 2 अन्य सतर्कता आयुक्त होते हैं। योग्यताएं अखिल भारतीय सेवाओं व केंद्रीय सेवाओं के अधिकारी इस पद पर नियुक्त किए जाते हैं। नियुक्ति कोलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की जाती है । कोलेजियम के अध्यक्ष प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री इसके सदस्य होते हैं। कार्यकाल इनका कार्यकाल 4 वर्ष का होता है तथा सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष होती है। मुख्य सतर्कता आयुक्त का दर्जा(status) UPSC के अध्यक्ष के बराबर तथा जबकि अन्य सतर्कता आयुक्तों का दर्जा UPSC के सदस्य के बराबर होता है। पदच्युत करना ...

राज्यों का पुनर्गठन

भारतीय जनता द्वारा स्वतंत्रता प्राप्त करने के पहले ही भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग की जाती रही परन्तु स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस मांग में और अधिक वृद्धि हो गई। स्वतंत्रता के समय भारत में तीन प्रकार की ईकाईयाँ थी। ब्रिटिश प्रांत देसी रियासतें चीफ कमिश्नरी प्रांत  1948 में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ० राजेंद्र प्रसाद द्वारा एस०के०दर की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया। दर आयोग ने भाषा के आधार पर राज्यों के गठन से इंकार कर दिया । 1949 में इस संदर्भ में कांग्रेस द्वारा पण्डित जवाहर लाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैया (जे०वी०पी०)समिति का गठन किया गया। इस समिति ने भी भाषा के आधार पर राज्य के गठन से इंकार कर दिया। 26 जनवरी 1950 को लागू होते समय भारत में चार प्रकार की इकाईयां थीं। ब्रिटिश प्रांत इनके हेड को राज्यपाल कहा जाता था। देसी रियासतें इनके पद को राजप्रमुख कहा जाता था। छोटी देसी रियासतें + चीफ कमिश्नरी प्रांत अंडमान / निकोबार दीप समूह 1अक्टूबर 1953 को आंध्र प्रदेश भाषा के आधार पर पहला राज्य बना । अनुच्छेद 3 में नए राज्य के गठन की प्रक्रिया का उल्लेख है ...