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Showing posts from February, 2021

सयुंक्त राज्य अमेरिका एवं ब्रिटिश प्रधानमंत्री की तुलना

समानताएं *संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री दोनों का निर्वाचन जनता द्वारा होता है । * दोनों लोकतंत्रीय  देशों के वास्तविक शासक और अपने देश की कार्यपालिका के प्रधान होते हैं । * दोनों को ही व्यापक विधायी ,कार्यपालिका एवं न्यायिक शक्तियां प्राप्त हैं ।संकटकाल में दोनों की शक्तियां अधिक विस्तृत होती हैं । दोनों दलीय नेता होते हैं । दोनों को सार्वजनिक जीवन का व्यापक अनुभव होता है ।  असमानताएं  *अमेरिकी राष्ट्रपति प्रत्यक्ष विधि से निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचित होता है जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कॉमन सभा में बहुमत दल का नेता होने के कारण नियुक्त होता है ।*संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति को संविधान द्वारा शक्तियां प्राप्त हैं ।कुछ शक्तियां उसे कांग्रेस की विधियों तथा न्यायालयों के निर्णय से भी मिली है परंतु उसकी स्थिति एवं शक्तियों का आधार संविधान है । जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री की शक्तियों का आधार अभिसमय एवं परम्पराएं हैं । * संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति सच्चे अर्थों में मंत्रिमंडल का स्वामी होता है इसके विपरीत ब्रिटिश प्रधानमंत्री केवल समकक्षों मे...

ब्रिटिश सम्राट और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की तुलना

समानतांए * ब्रिटिश सम्राट एवं संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति दोनों ही अपने- अपने देशों के राष्ट्राध्यक्ष है । * ब्रिटिश सम्राट की तरह अमेरिकी राष्टपति भी कुछ औपचारिक कर्तव्यों को सम्पादित करता है । जैसे विदेशी राजदूतों का स्वागत, समारोहो में भाग लेना । असमानताएं * ब्रिटिश राजा/ सम्राट  राज्य का अध्यक्ष है शासन का अध्यक्ष नहीं है । अमेरिका का राष्ट्रपति राज्य एवं कार्यपालिका दोनों का अध्यक्ष है ।वह वास्तविक शासक है । शासन संबंधी सभी निर्णय उसके द्वारा किए जाते हैं ।वह मंत्रियों को अपनी इच्छा अनुसार नियुक्त कर सकता है एवं पद से हटा सकता है ।ब्रिटिश राजा का पद वंशानुगत होता है वह जीवन भर पदारूढ़ रहता है । संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचित होता है और अधिक से अधिक दो काल तक पद पर आरूढ़ रह सकता है ।  *ब्रिटिश सम्राट न्याय का स्रोत है परन्तु क्षमादान की शक्तियों का प्रयोग वह मंत्रिमंडल के परामर्श अनुसार करता है जबकि अमेरिका का राष्ट्रपति क्षमादान की शक्ति का प्रयोग स्वयं करता है । * अमेरिकी राष्ट्रपति को आदेश जारी करने का अधिकार है परंतु ब्रिटिश ...

अरस्तू के क्रान्ति पर विचार

अरस्तू के समय यूनानी नगर- राज्यों में क्रान्तियों के माध्यम से अक्सर राजनीतिक परिवर्तन होने लगे थे। इससे नगर- राज्यों के राजनीतिक जीवन में अस्थिरता के लक्षण उत्पन्न हो गये थे जो उनके लिए विभिन्न संकटो को जन्म देकर उनकी स्थिति को विषम बना रहे थे । अरस्तू इससे चिंतित था। अरस्तू ने पॉलिटिक्स की 5 वीं पुस्तक में क्रान्ति का गहन अध्ययन किया और उनके मूलभूत कारणों का विवेचन करते हुए रोकने लिए विशद उपचारों की व्यवस्था की जिससे कि राज्य में उत्पन्न अस्थिरता के वातावरण को समाप्त कर स्थिरता स्थापित की जा सके। अरस्तू के अनुसार क्रान्ति से तात्पर्य उन मूलभूत परिवर्तनों से होता है जिनसे समाज की काया पलट जाती है और जिनसे वह विकास की नई दिशाओं की ओर अग्रसर होता है। क्रान्ति का अर्थ सांविधान में हर छोटा- बड़ा परिवर्तन है । यदि परिवर्तन पूर्ण होता है तो वह पूर्ण क्रान्ति है यदि संविधान के एक भाग में क्रान्ति हो तो आंशिक क्रान्ति होती है । पूर्ण क्रान्ति जैसे निरकुंश तंत्र का जनतंत्र में बदलना । आंशिक क्रान्ति जब शासन के किसी विभाग में उग्र परिवर्तन किये जाएं। अरस्तू के अनुसार क्रान्ति के उद्देश्य  दे...