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एम एन राय और रेडिकल पार्टी

एम० एन ० राय (M.N. Roy) का राजनीतिक सफर भारतीय इतिहास के सबसे रोमांचक, क्रांतिकारी और वैचारिक रूप से परिवर्तनकारी अध्यायों में से एक है। उन्होंने एक कट्टर राष्ट्रवादी से लेकर कम्युनिस्ट अंतरराष्ट्रीय नेता और अंततः 'रैडिकल ह्यूमैनिज्म' (नव-मानववाद) के प्रणेता तक का लंबा सफर तय किया। इसी वैचारिक यात्रा के अंतिम और सबसे परिपक्व चरण में उन्होंने 'रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी' (Radical Democratic Party - RDP) की स्थापना की थी।

एम० एन ० राय के राजनीतिक सफर के मुख्य पड़ाव और रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी के गठन की पूरी कहानी निम्नलिखित है:

एम० एन ० राय के राजनीतिक सफर के मुख्य पड़ाव

  1. क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का दौर (1905–1915):

    • अपने शुरुआती जीवन में राय (मूल नाम: नरेंद्रनाथ भट्टाचार्य) बंगाल के प्रसिद्ध क्रांतिकारी संगठन 'अनुशीलन समिति' से जुड़े थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ कई सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों और डकैतियों (जैसे बारिज़ाड डकैती) में हिस्सा लिया। हथियारों के लिए विदेशों से संपर्क साधने के सिलसिले में वे कई देशों की यात्रा पर निकले और भूमिगत हो गए।

  2. कम्युनिस्ट इंटरनेशनल और विश्व स्तर पर उदय (1916–1929):

    • विदेश यात्रा के दौरान अमेरिका और मैक्सिको में उनका परिचय मार्क्सवाद से हुआ। मैक्सिको में उन्होंने मैक्सिकन कम्युनिस्ट पार्टी (1919) की स्थापना की।

    • उनकी वैचारिक क्षमता से प्रभावित होकर व्लादिमीर लेनिन ने उन्हें मास्को बुलाया। 1920 के कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (Comintern) के दूसरे अधिवेशन में उन्होंने लेनिन के साथ औपनिवेशिक देशों की क्रांति पर अपने प्रसिद्ध पूरक विचार रखे।

    • 1920 में उन्होंने ताशकंद में 'भारत की कम्युनिस्ट पार्टी' (CPI) की स्थापना की और भारत के पहले कम्युनिस्ट नेता बने। हालांकि, सोवियत नेतृत्व से मतभेदों और स्टालिन के बढ़ते प्रभाव के कारण 1928-29 में उन्हें कम्युनिस्ट इंटरनेशनल से निष्कासित कर दिया गया।

  3. कांग्रेस पार्टी के भीतर वामपंथी प्रभाव और गिरफ्तारी (1930–1936):

    • 1930 में राय गुप्त रूप से भारत लौटे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर रहकर वामपंथी और क्रांतिकारी विचारों को बढ़ावा देने की कोशिश की।

    • ब्रिटिश सरकार ने उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और 1931 से 1936 तक उन्हें हजारीबाग जेल में बंद रखा गया। जेल के इन छह वर्षों में उन्होंने भारी अध्ययन किया और अपने मौलिक दर्शन (मार्क्सवाद से आगे बढ़कर मानवतावाद की ओर झुकाव) की नींव रखी।

  4. कांग्रेस से अलगाव और युद्ध के दौरान रुख (1939–1940):

    • जेल से छूटने के बाद राय कुछ समय तक कांग्रेस के अंदर रहे और सुभाष चंद्र बोस तथा जवाहरलाल नेहरू के संपर्क में आए। लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू होने पर कांग्रेस और राय के दृष्टिकोण में बड़ा अंतर आ गया।

    • कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार का समर्थन करने से मना कर दिया, जबकि राय का मानना था कि फासीवाद और नाजीवाद (हिटलर-मुसोलिनी) मानवता के लिए कम्युनिस्ट या ब्रिटिश साम्राज्य से भी बड़ा खतरा हैं। इसलिए उन्होंने फासीवाद को हराने के लिए ब्रिटेन और मित्र राष्ट्रों के समर्थन का आह्वान किया। इसी मतभेद के चलते उन्होंने 1940 में कांग्रेस छोड़ दी।

रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी (RDP) का गठन और कार्यप्रणाली

कांग्रेस से अलग होने के बाद राय ने महसूस किया कि देश को केवल राजनीतिक आजादी नहीं, बल्कि एक नए सामाजिक और राजनीतिक दर्शन की जरूरत है।

  • स्थापना (1940): दिसंबर 1940 में एम० एन ० राय और उनके सहयोगियों ने मिलकर 'लीग ऑफ रेडिकल कांग्रेसमैन' की शुरुआत की, जिसे बाद में दिसंबर 1942 में 'रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी' (Radical Democratic Party - RDP) का रूप दे दिया गया।

  • पार्टी के मुख्य उद्देश्य:

    1. फासीवाद विरोधी संघर्ष: द्वितीय विश्व युद्ध में फासीवादी ताकतों को परास्त करना।

    2. पारंपरिक राजनीति का विरोध: यह पार्टी कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों की नीतियों की आलोचना करती थी, क्योंकि उनका मानना था कि ये दल आम जनता की भलाई के बजाय केवल सत्ता के सौदेबाजी में लगे हैं।

    3. पीपल्स प्लान (People's Plan - 1944): भारत के आर्थिक विकास के लिए राय ने एक जन-हितैषी योजना प्रस्तुत की, जिसे 'पीपल्स प्लान' कहा गया। इसमें कृषि के आधुनिकीकरण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और आम जनता की क्रय शक्ति बढ़ाने पर जोर दिया गया था।

  • पार्टी का विघटन (1948): 1946 के चुनावों में रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी को कोई खास electoral success (चुनावी सफलता) नहीं मिली, क्योंकि देश का माहौल उस समय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के पक्ष में था। 1948 में राय इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि "राजनीतिक दल" (Political Parties) चाहे कोई भी हों, अंततः सत्ता की लालसा में जनता का शोषण करते हैं। इसलिए उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से 'रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी' को खुद ही भंग कर दिया और अपना पूरा जीवन 'रैडिकल ह्यूमैनिज्म' (Radical Humanism) के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।

निष्कर्ष

एम० एन ० राय का राजनीतिक सफर इस बात का अनूठा उदाहरण है कि एक व्यक्ति किस प्रकार कट्टर राष्ट्रवाद से साम्यवाद और फिर साम्यवाद से मोहभंग होने के बाद मानव-केन्द्रित स्वतंत्र चिंतन (रैडिकल ह्यूमैनिज्म) तक की लंबी यात्रा तय कर सकता है। 'रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी' का गठन और अंत में उसे खुद भंग कर देना उनके इसी बौद्धिक और नैतिक साहस का प्रमाण था।

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