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कौटिल्य का मंदल सिद्धान्त और भारतीय कूटनीति

कौटिल्य (चाणक्य) का 'मंडल सिद्धांत' (Mandala Theory of Foreign Policy) प्राचीन भारतीय कूटनीति का सबसे वैज्ञानिक और दूरदर्शी मॉडल है। यह सिद्धांत भू-राजनीति (Geopolitics) की इस वास्तविकता पर आधारित है कि "पड़ोसी राज्य स्वाभाविक रूप से प्रतिद्वंद्वी (रिपु) होता है और पड़ोसी का पड़ोसी मित्र होता है।"

21वीं सदी की वर्तमान वैश्विक व्यवस्था, विशेषकर भारत की भू-रणनीतिक स्थिति और चीन के बढ़ते प्रभाव के परिप्रेक्ष्य में, कौटिल्य का मंडल सिद्धांत पूरी तरह सटीक बैठता है। वर्तमान और ठोस उदाहरणों के माध्यम से इसे नीचे विस्तृत रूप से समझा गया है:

1. "पड़ोसी ही स्वाभाविक शत्रु (रिपु) होता है" — भारत और चीन का संदर्भ

कौटिल्य के अनुसार, सीमाओं को साझा करने वाले दो पड़ोसी राज्य अक्सर क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए संघर्ष करते हैं।

  • वर्तमान उदाहरण: भारत और चीन के बीच की स्थिति इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। लद्दाख (गलवान घाटी) से लेकर अरुणाचल प्रदेश की सीमा तक दोनों देशों के बीच भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है। चीन लगातार भारत के पड़ोसी देशों में अपना प्रभाव बढ़ाकर भारत को सामरिक रूप से घेरने की कोशिश कर रहा है, जिसे कौटिल्य ने 'रिपु' (शत्रु) की आक्रामक प्रवृत्ति के रूप में हजारों साल पहले परिभाषित किया था।

2. "पड़ोसी का पड़ोसी मित्र होता है" — भारत की 'एक्ट ईस्ट' और हिंद-प्रशांत नीति

कौटिल्य का सिद्धांत कहता है कि आपके शत्रु का जो पड़ोसी है (यानी आपके शत्रु का शत्रु), वह स्वाभाविक रूप से आपका मित्र बन सकता है क्योंकि दोनों का साझा हित उस शत्रु को नियंत्रित करना है।

  • वर्तमान उदाहरण: चीन भारत का मुख्य सामरिक प्रतिद्वंद्वी है। चीन के पड़ोसी देश जैसे वियतनाम, फिलीपींस, जापान, ताइवान और दक्षिण कोरिया भी चीन के आक्रामक रवैये से पीड़ित हैं। भारत ने कौटिल्य के इसी सूत्र को अपनाते हुए वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइलें बेची हैं, फिलीपींस के साथ रक्षा संबंध मजबूत किए हैं और अमेरिका, जापान व ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर 'क्वाड' (QUAD) गठबंधन बनाया है। यहाँ जापान और अमेरिका, चीन के 'पड़ोसी के पड़ोसी' (यानी दूर के बड़े देश) हैं, जो भारत के स्वाभाविक मित्र बन गए हैं।

3. बफर स्टेट (Buffer State) और नेपाल-भूटान की महत्ता

कौटिल्य ने अपने मंडल सिद्धांत में मध्यवर्ती राज्यों (Madhyama या Udaseena) और बफर स्टेट्स का जिक्र किया है जो दो बड़ी ताकतों के बीच एक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

  • वर्तमान उदाहरण: भारत और चीन जैसी दो महाशक्तियों के बीच स्थित नेपाल और भूटान बफर स्टेट्स की भूमिका निभाते हैं। भारत हमेशा से इन देशों के साथ अपने आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत रखकर यह सुनिश्चित करता है कि चीन इन देशों का इस्तेमाल भारत की आंतरिक सुरक्षा के खिलाफ न कर सके। यह कौटिल्य के उस कूटनीतिक प्रबंधन का आधुनिक रूप है जिसमें पड़ोसी राज्यों को शत्रु बनने से रोकने के लिए कूटनीतिक संवाद और 'साम-दाम' का प्रयोग किया जाता है।

4. हिंद महासागर और 'अरिविजयी' कूटनीति (Indo-Pacific & Maritime Diplomacy)

कौटिल्य ने समुद्र तटवर्ती राज्यों के महत्व को समझते हुए मजबूत नौसेना और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया था।

  • वर्तमान उदाहरण: आज की वैश्विक राजनीति का केंद्र बदल चुका है और यह हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र बन गया है। चीन अपनी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (मोती की माला) नीति के जरिए भारत को हिंद महासागर में घेरना चाहता है। इसके जवाब में भारत ने मालदीव, श्रीलंका, सेशेल्स और मॉरीशस के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग, साझा गश्त (Joint Patrol) और रणनीतिक निवेश को बढ़ाया है। यह कौटिल्य के उस सिद्धांत का आधुनिक विस्तार है जिसमें समुद्री सीमाओं और व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

निष्कर्ष

कौटिल्य का 'मंडल सिद्धांत' कोई कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक यथार्थवाद (Geopolitical Realism) का अकाट्य दस्तावेज है। आज भारत सरकार जिस प्रकार अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति, 'एक्ट ईस्ट' नीति, हिंद-प्रशांत सुरक्षा वास्तुकला और क्वाड जैसे गठबंधनों को संचालित कर रही है, वह अनजाने या जानबूझकर कौटिल्य के मंडल सिद्धांत का ही 21वीं सदी का जीवंत और सफल क्रियान्वयन है।

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