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विकास की गतिशीलता


विकास की गतिशीलता, विकास की अवधारणा और विकास प्रशासन की बदलती प्रोफाइल

परिचय: प्रशासनिक विकास का ऐतिहासिक परिदृश्य

द्वितीय विश्वयुद्ध के उपरांत जब एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र हुए, तो उनके सम्मुख सबसे बड़ी चुनौती अपने जर्जर सामाजिक-आर्थिक ढांचे को पुनर्जीवित करने और राष्ट्र-निर्माण की थी। पारंपरिक पश्चिमी लोक प्रशासन (Traditional Public Administration) पश्चिमी देशों की स्थिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित हुआ था, जो विकासशील समाजों की तीव्र आकांक्षाओं और समस्याओं को हल करने में असमर्थ साबित हुआ।

इसी ऐतिहासिक आवश्यकता से 'विकास प्रशासन' (Development Administration) की अवधारणा का जन्म हुआ, जो एक लक्ष्य-उन्मुख (Goal-oriented) और परिवर्तन-प्रेरित (Change-oriented) प्रशासनिक प्रणाली है।

1. विकास की अवधारणा के बदलते आयाम

'विकास' शब्द समय के साथ अत्यंत गतिशील रहा है। इसके वैचारिक विकास को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:

  • आर्थिक विकास केंद्रित दृष्टिकोण (1950-60 का दशक): इस काल में विकास का पर्याय केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP), प्रति व्यक्ति आय और औद्योगिकीकरण की वृद्धि दर तक सीमित था। यह माना जाता था कि आर्थिक वृद्धि अपने आप समाज के निचले पायदान तक पहुँच जाएगी (Trickle-down theory)।
  • मानव-केंद्रित और कल्याणकारी दृष्टिकोण: 1970 के दशक में यह स्पष्ट हुआ कि केवल आर्थिक वृद्धि से मानवीय दशाओं में सुधार नहीं होता। महबूब उल हक द्वारा प्रतिपादित मानव विकास सूचकांक (HDI) और अमर्त्य सेन के 'विकास बतौर स्वतंत्रता' (Development as Freedom) के विचार ने विकास की धुरी को आर्थिक आंकड़ों से हटाकर मानव क्षमताओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय पर केंद्रित कर दिया।
  • सतत और समावेशी विकास (Sustainable and Inclusive Development): समकालीन दौर में विकास का अर्थ केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करना नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के अधिकारों का संरक्षण करते हुए पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDGs) इसके वैश्विक मानक हैं।

2. पारंपरिक लोक प्रशासन बनाम विकास प्रशासन

जॉर्ज ग्रांट (George Gant), एडवर्ड वीडनर (Edward Weidner) और फ्रेड रिग्स (Fred Riggs) जैसे विचारकों ने पारंपरिक लोक प्रशासन और विकास प्रशासन के बीच बुनियादी अंतर स्पष्ट किया है:

मानदंडपारंपरिक लोक प्रशासनविकास प्रशासन
मुख्य उद्देश्यकानून-व्यवस्था बनाए रखना और कर संग्रह करना।सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण।
प्रकृतिरूढ़िवादी, यथास्थितिवादी और पदानुक्रम आधारित।नवाचार-उन्मुख, गतिशील और परिवर्तनशील।
दृष्टिकोणआंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं पर केंद्रित।परिणामों, लक्ष्यों और जनता की संतुष्टि पर केंद्रित।
जनता की भूमिकाप्राप्तकर्ता (Recipient) या केवल नियम का पालन करने वाली।सक्रिय भागीदार (Active Participant) और निर्णयकर्ता।

3. विकास प्रशासन की सैद्धांतिक रूपरेखा: फ्रेड रिग्स का योगदान

तुलनात्मक लोक प्रशासन के प्रख्यात विद्वान फ्रेड रिग्स ने विकासशील समाजों की प्रशासनिक प्रणालियों को समझने के लिए 'प्रिज्मेटिक-साला मॉडल' (Prismatic-Sala Model) का प्रतिपादन किया।

  • रिग्स के अनुसार, विकासशील देशों की प्रशासनिक संरचनाएँ 'साला' (Sala) संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहाँ आधुनिक और पारंपरिक मूल्य एक साथ संकुचित रूप से कार्य करते हैं।
  • यहाँ नियम और वास्तविकता में भारी अंतर होता है (जिसे उन्होंने 'औपचारिकता' या Formalism कहा है)।
  • विकास प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इसी संक्रमणकालीन और जटिल व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी, कुशल और साध्य बनाना है ताकि नीतियों का वास्तविक लाभ धरातल पर उतर सके।

4. विकास प्रशासन की बदलती प्रोफाइल: समकालीन प्रवृत्तियाँ

वैश्वीकरण, उदारीकरण और डिजिटल क्रांति के इस युग में विकास प्रशासन का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। इसकी आधुनिक प्रोफाइल के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं:

क. केंद्रीकरण से विकेंद्रीकरण और सहभागिता की ओर

पहले नीतियां केंद्रीय स्तर पर बनाई जाती थीं और जनता पर थोपी जाती थीं। अब पंचायती राज संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों और सामुदायिक संगठनों (Community-Based Organizations) के माध्यम से 'नीचे से ऊपर' (Bottom-up approach) की नीति अपनाई जा रही है।

ख. ई-गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन

आज विकास प्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) की भूमिका केंद्रीय हो गई है। आधार (Aadhaar), डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), और विभिन्न डिजिटल पोर्टल्स ने सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को कम किया है और पारदर्शिता बढ़ाई है। प्रशासनिक प्रक्रियाएं अब 'स्मार्ट' (Simple, Moral, Accountable, Responsive, and Transparent) गवर्नेंस के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

ग. लोक-निजी भागीदारी (PPP Model) और सिविल सोसायटी

विकास अब केवल सरकार का एकाधिकार नहीं रह गया है। बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में PPP मॉडल के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और सिविल सोसायटी की सक्रिय भागीदारी ने विकास के दायरे को व्यापक बना दिया है।

घ. पर्यावरणीय संवेदनशीलता और क्लाइमेट गवर्नेंस

समकालीन विकास प्रशासन के सामने जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती है। अब प्रशासनिक नीतियों का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाता है कि वे पर्यावरण के अनुकूल हैं या नहीं। हरित ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और सतत कृषि विकास प्रशासन की नई प्राथमिकताएं हैं।

5. समकालीन मार्ग की प्रमुख चुनौतियाँ

विकास प्रशासन की प्रोफाइल के आधुनिक होने के बावजूद इसके समक्ष कई संरचनात्मक और व्यावहारिक चुनौतियाँ बनी हुई हैं:

  1. नौकरशाही की जड़ता (Bureaucratic Inertia): लालफीताशाही (Red-tapism) और उत्तरदायित्व से बचने की प्रवृत्ति आज भी योजनाओं की गति को धीमा करती है।
  2. क्षमता और कौशल अंतराल: प्रशासनिक मशीनरी में आधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करने वाले प्रशिक्षित कार्मिकों की कमी।
  3. क्षेत्रीय असमानता: वैश्वीकरण के लाभों का सभी क्षेत्रों और वर्गों तक समान रूप से न पहुँच पाना।

निष्कर्ष

विकास की गतिशीलता इस बात का अकादमिक और व्यावहारिक प्रमाण है कि प्रशासनिक प्रणालियाँ स्थिर नहीं हो सकतीं। आज विकास प्रशासन को केवल नियमों का पालन कराने वाली मशीनरी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, समावेशी और भविष्योन्मुख उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करना होगा। जब तक प्रशासन समाज के अंतिम व्यक्ति की आकांक्षाओं और गरिमा को सुरक्षित नहीं करता, तब तक विकास की अवधारणा अधूरी रहेगी।


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