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अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद और विश्व की वर्तमान कूटनीति

अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद और विश्व की वर्तमान कूटनीति

आधुनिक वैश्विक व्यवस्था में अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद और कूटनीति का अंतर्संबंध केवल वैचारिक बहसों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरातल पर हो रही घटनाओं और वैश्विक गठजोड़ की मुख्य धुरी बन चुका है। हालिया वैश्विक रिपोर्ट्स और भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने यह प्रमाणित कर दिया है कि आतंकवाद के तौर-तरीके और उससे निपटने के कूटनीतिक आयाम निरंतर परिवर्तित हो रहे हैं।

1. आतंकवाद का बदलता भूगोल और भू-राजनीतिक हॉटस्पॉट

पारंपरिक रूप से आतंकवाद का केंद्र मध्य पूर्व को माना जाता था, किंतु वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इसके केंद्र और स्वरूप दोनों बदल चुके हैं:

  • साहेल क्षेत्र: वर्तमान में अफ्रीका का साहेल क्षेत्र (विशेषकर बुर्किना फासो, माली और नाइजर) आतंकवाद का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहाँ कुल वैश्विक मौतों का एक बड़ा हिस्सा दर्ज किया जा रहा है।

  • दक्षिण एशिया में बदलते समीकरण: सीमा-पार आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता ने कूटनीतिक तनाव को गंभीर स्तर पर पहुँचा दिया है। विभिन्न संगठनों की सक्रियता के कारण कूटनीतिक मोर्चे पर क्षेत्रीय सुरक्षा की नई चुनौतियाँ खड़ी हुई हैं।

  • सीमावर्ती क्षेत्रों की भेद्यता: विश्लेषणात्मक आंकड़े दर्शाते हैं कि अधिकांश आतंकवादी हमले अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के नजदीकी क्षेत्रों में होते हैं। यह प्रवृत्ति स्पष्ट करती है कि कमजोर शासन प्रणाली और सीमा-प्रबंधन की कमियों का लाभ उठाकर किस प्रकार गैर-राज्य अभिनेता कूटनीतिक तनाव का फायदा उठाते हैं।

2. समकालीन कूटनीति पर आतंकवाद के प्रत्यक्ष प्रभाव

वर्तमान विश्व कूटनीति में आतंकवाद के खिलाफ अपनाए जाने वाले रुख ने देशों के बीच संबंधों की परिभाषा को बदल दिया है:

समकालीन कूटनीतिक आयामवर्तमान प्रभाव एवं प्रवृत्तियाँ
प्रॉक्सी युद्ध और प्रत्यक्ष संघर्षविभिन्न क्षेत्रों में राज्य-प्रायोजित आतंकवाद और प्रॉक्सी नेटवर्क के कारण प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के जोखिम बढ़े हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हुई है।
पश्चिमी देशों में 'लोन-वोल्फ' और वैचारिक अतिवादपश्चिमी देशों में पारंपरिक संगठित हमलों के स्थान पर वैचारिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक अतिवाद से प्रेरित 'लोन-वोल्फ' (Lone-wolf) हमलों में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे कूटनीति में आंतरिक सुरक्षा और आप्रवासन नीतियों पर नए सिरे से कड़े प्रतिबंध लगाने का दबाव बढ़ा है।
युवाओं का ऑनलाइन कट्टरपंथीकरणसोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से वैश्विक स्तर पर कम उम्र के युवाओं को प्रभावित किया जा रहा है, जिसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों और संप्रभु सरकारों के बीच कूटनीतिक समन्वय की मांग बढ़ रही है।

3. आतंकवाद-रोधी कूटनीति: भारत की भूमिका और वैश्विक मंच

भारत ने वैश्विक मंचों पर हमेशा से आतंकवाद के प्रति 'शून्य-सहिष्णुता' (Zero Tolerance) की नीति की वकालत की है।

  • रणनीतिक कूटनीति में सुधार: भारत ने संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और एफएटीएफ (FATF) जैसे मंचों पर दोहरे मानदंडों को त्यागने पर जोर दिया है।

  • क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद में नियंत्रण: भारत ने अपनी आंतरिक सुरक्षा रणनीतियों, बेहतर सीमा प्रबंधन और खुफिया तंत्र के मजबूत समन्वय से आतंकवादी गतिविधियों पर उल्लेखनीय अंकुश लगाया है। यह स्थिति आतंकवाद के खिलाफ एक सशक्त कूटनीतिक और सुरक्षात्मक संदेश देती है।

निष्कर्ष

वर्तमान विश्व कूटनीति इस बात का प्रमाण है कि आतंकवाद अब केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं रही, बल्कि यह भू-राजनीतिक सौदेबाजी और शक्ति संतुलन का साधन बन चुका है। जब तक वैश्विक समुदाय अपने भू-राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर आतंकवाद के खिलाफ एक ठोस और निष्पक्ष नीति नहीं अपनाता, तब तक वैश्विक शांति और संप्रभुता की रक्षा करना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

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