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भारत -रूस संबंध

भारत और रूस के संबंध: समकालीन भू-राजनीति, वर्तमान उदाहरण और भविष्य की दिशा

भारत और रूस के बीच के संबंध केवल कूटनीतिक साझेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दो देशों के बीच आपसी विश्वास, रणनीतिक स्वायत्तता और दशकों पुराने भरोसे का प्रतीक हैं। वैश्विक राजनीति में कई उतार-चढ़ाव आने के बावजूद, भारत-रूस की दोस्ती हमेशा मजबूत बनी रही है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में यह साझेदारी नए आयाम छू रही है, जिसमें व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और अंतरिक्ष विज्ञान के मोर्चे पर अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिली है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’

भारत और रूस के संबंधों की नींव शीत युद्ध के दौर में ही रख दी गई थी। साल 1971 में हुई भारत-सोवियत शांति, मित्रता और सहयोग संधि ने इन रिश्तों को एक मजबूत और ऐतिहासिक आधार दिया।

  • सोवियत संघ का समर्थन: कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोवियत संघ (USSR) ने कई बार भारत का पक्ष लिया और वीटो पावर का इस्तेमाल करके भारत के सामरिक हितों की रक्षा की।
  • 1998 की डैक्सटर घोषणा: सोवियत संघ के विघटन के बाद, साल 1998 में रूसी राष्ट्रपति येवगेनी प्रिमाकोव और भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच हुए समझौतों ने रिश्तों को नई और स्वतंत्र दिशा दी।
  • वर्तमान स्वरूप: साल 2010 में इन संबंधों को 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' (Special and Privileged Strategic Partnership) में अपग्रेड किया गया। दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन (Annual Summit) इस कूटनीति का सबसे बड़ा और प्रभावी केंद्र बिंदु है।

रक्षा और सामरिक सहयोग (Defense & Strategic Cooperation)

रक्षा क्षेत्र भारत और रूस के बीच संबंधों का सबसे मजबूत स्तंभ रहा है। वर्तमान समय में भी भारत अपने रक्षा उपकरणों के लिए रूस पर एक बड़े हिस्से में निर्भर है, साथ ही यह रिश्ता अब पारंपरिक 'खरीदार-विक्रेता' से आगे बढ़कर 'संयुक्त अनुसंधान और विकास' की ओर बढ़ चुका है।

  • मेक इन इंडिया और संयुक्त उत्पादन: इसका सबसे जीवंत उदाहरण ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे दोनों देशों ने मिलकर विकसित किया है और अब इसके निर्यात पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा, सैन्य प्रणालियों की त्वरित तैनाती और तकनीकी हस्तांतरण पर दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच लगातार उच्चस्तरीय संवाद जारी है।
  • प्रमुख सैन्य उपकरण: भारतीय सशस्त्र बलों के पास रूस निर्मित सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान, टी-90 भीष्म टैंक, और अत्याधुनिक एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती देश की वायु रक्षा और थल सेना को अत्यधिक मजबूती प्रदान करती है।
  • सैन्य अभ्यास: दोनों देशों की सेनाएं आतंकवाद से निपटने और आपसी युद्ध कौशल को बेहतर करने के लिए नियमित रूप से 'इंद्र' (INDRA) और 'वोस्तोक' (Vostok) जैसे बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यासों में हिस्सा लेती हैं।

ऊर्जा, व्यापार और आर्थिक सहयोग: वर्तमान परिदृश्य और आंकड़े

हाल के वर्षों में भारत और रूस के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में अभूतपूर्व उछाल आया है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

  • व्यापार में ऐतिहासिक वृद्धि: भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जो वित्त वर्ष 2021-22 के लगभग 13 अरब डॉलर से छलांग लगाकर हाल के वर्षों में करीब 60 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है।
  • ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल का आयात: पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकटों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितताओं के बीच रूस ने भारत को ऊर्जा और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिया है। वर्तमान में भारत के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 35% से अधिक बनी हुई है, जिसने देश की ऊर्जा सुरक्षा को एक नया स्थायित्व दिया है।
  • चुनौतियाँ और समाधान (व्यापार असंतुलन): इस व्यापारिक उछाल के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance) एक बड़ी चिंता का विषय रहा है, क्योंकि भारत का आयात (विशेषकर ऊर्जा और उर्वरक) रूस को किए जाने वाले निर्यात की तुलना में काफी अधिक है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी समकक्षों के बीच हुई बैठकों में इस असंतुलन को पाटने, भुगतान तंत्र (रुपये-रूबल व्यापार) को अधिक सुगम बनाने और लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • परमाणु और अंतरिक्ष सहयोग: तमिलनाडु का कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) तकनीकी और ऊर्जा सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके साथ ही, भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ने रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में विशेष और कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जो दोनों देशों के वैज्ञानिक तालमेल को दर्शाता है।

भू-राजनीतिक चुनौतियां और भविष्य की राह

बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और रूस के सामने कुछ नई चुनौतियां भी उभरी हैं, जैसे रूस और चीन की बढ़ती रणनीतिक नजदीकियां। हालांकि, भारत की 'Strategic Autonomy' (रणनीतिक स्वायत्तता) की स्वतंत्र विदेश नीति और रूस के साथ उसका संतुलित दृष्टिकोण इस रिश्ते को हर बाहरी चुनौती से पार पाने में पूरी तरह सक्षम बनाता है।

  • बहुध्रुवीय विश्व और बहुपक्षीय मंच: दोनों देश एक निष्पक्ष और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था (Multiplex World) के पक्षधर हैं। ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और जी-20 जैसे प्रमुख मंचों पर भारत और रूस वैश्विक आतंकवाद, आर्थिक सुरक्षा और आपसी हितों के मुद्दों पर एक साझा और मजबूत रुख अपनाते हैं।
  • कनेक्टिविटी परियोजनाएं: अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मैरीटाइम कॉरिडोर जैसी भविष्य की रणनीतिक परियोजनाएं दोनों देशों के बीच व्यापारिक दूरियों और परिवहन लागत को और कम करने के लिए तेजी से प्रगति पर हैं।

निष्कर्ष: वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भारत और रूस के संबंध समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर अत्याधुनिक रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष अनुसंधान तक, यह साझेदारी आपसी सम्मान, राष्ट्रीय संप्रभुता और साझा हितों पर टिकी है। यह रिश्ता आने वाले दशकों में वैश्विक शांति, बहुध्रुवीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत प्रासंगिक और मजबूत बना रहेगा।


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