26 जनवरी 1950 को जब भारतीय संविधान लागू हुआ तो राष्ट्र के लिए न्याय ,समता , स्वतंत्रता और बंधुत्व के आदर्शों की प्राप्ति सर्वोच्च मानी गई। संविधान में समता पर दिया गया सारा जोर संघीय भावना और विचारों के इर्द गिर्द निर्मित सभी व्यवस्थाओं में दिखाई देता है । विभिन्न राज्यों की जनसंख्या की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए संविधान के निर्माताओं ने सरकारों के विभिन्न स्तरों पर शक्तियों और उत्तरदायित्वों के न्यायसंगत हिस्सेदारी का प्रावधान किया गया । भारतीय संघवाद की प्रकृति को के० सी ० व्हियर ने अर्द्ध संघीय (quasi fedral) बताया है। राज्यों एवम् केंद्र से संबंधित विधायी शक्तियां भारतीय संविधान के अनुच्छेद 245 से 254 tk वर्णित हैं। शासन व्यवस्था दो प्रकार की हो सकती है: संघात्मक एकात्मक संघात्मक एक ऐसी शासन व्यवस्था जहाँ केंद्र के साथ राज्य सरकारों का अस्तित्व हो तथा केंद्र और राज्यों के बीच कार्यों का बटवारा होता हो। इस प्रकार की व्यवस्था को संघात्मक शासन व्यवस्था कहा जाता है। इसका उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका है। एकात्मक एक ऐसी शासन व्यवस्था जहाँ राज्य सरकारों का कोई अस्तित्व नह...